फोन फोबिया:क्या आपको भी होता है

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क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि आप परिवार या दोस्तों के साथ बैठकर बातें कर रहे हों और अचानक लगे कि पॉकेट में रखा आपका फोन वाइब्रेट कर रहा है और जब फोन निकालकर देखा, तो न कोई मैसेज और न ही कोई कॉल। बैठे-बिठाए अचानक ऐसा महसूस होना ‘फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम’ हो सकता है। ये परेशानी लगातार बढ़ रही है, क्योंकि मोबाइल के इस्तेमाल का ग्राफ हर दिन ऊपर जा रहा है। इस बारे में हमने बात की है बत्रा हॉस्पिटल के सीनियर साइकेट्रिस्ट डॉ. धर्मेंद्र सिंह से।

उन्होंने बताया कि एक रिपोर्ट में ये बात सामने आई है कि 10 में से 9 लोगों को कई बार ये भ्रम हुआ है कि उनका मोबाइल बज रहा है। जॉर्जिया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर और फिलॉसफर डॉक्टर रोबर्ट रोसेनबर्जर का मानना है कि ये ‘लर्न्ड बॉडिली हैबिट्स’ है।

फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम की वजह क्या है?

डॉ. सिंह के मुताबिक ब्रेन में रि-वायरिंग होती है। व्यक्ति अगर बार-बार अपना फोन इस्तेमाल करता है और लगातार मोबाइल वाइब्रेशन मोड में रखता है, तब भी उसे ऐसी परेशानी हो सकती है। फोन पर बहुत ज्यादा डिपेंडेंसी होने की वजह से ऐसा होता है। ये एक इमर्जिंग साइकेट्रिक कंडीशन है, जो लोगों में-

टैक्टाइल हेलुसिनेशन - किसी ऐसी चीज को महसूस करना, जो असल में होती नहीं है

एंग्जायटी / डिप्रेशन - जिन्हें किसी भी तरह की चिंता या स्ट्रेस हो

गैजेट एडिक्शन - जिन्हें गैजेट से ज्यादा लगाव होता है

अटेंशन कंसंट्रेशन डेफिसिट - किसी भी चीज में ध्यान न लगा पाना

इमोशनल डिस्टर्बेंस - चिढ़चिढ़ापन, हमेशा अपने गैजेट के बारे में सोचते रहना

ओवर विजिलेंस - छोटी-छोटी आवाजें भी सुनाई देती हैं (जैसे घड़ी, फ्रिज की आवाज या वाइब्रेशन सुनाई देना)

फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम मोबाइल के बहुत ज्यादा इस्तेमाल करने से हो सकती है
फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम मोबाइल के बहुत ज्यादा इस्तेमाल करने से हो सकती है

कैसे निपटें इस परेशानी से?

टाइम स्पेंड घटाएं - बिंज वाचिंग से बचें। लगातार मोबाइल पर समय बिताने से हटकर दूसरे विकल्प चुनें।

फोन को वाइब्रेशन में रखने से बचें - मोबाइल को वाइब्रेशन से बदलकर रिंगिंग मोड में रखें।

एक्सरसाइज और गेम्स - जब आप वर्कआउट करते हैं और गेम खेलते हैं, तो आपका दिमाग मोबाइल से हटता है।

फोन डिपेंडेंसी हो कम - एंटरटेनमेंट के लिए फोन के बजाय फैमिली-फ्रेंड्स और आउटडोर एक्टिविटी से जुड़ें।

डॉक्टर से मिलें - अगर आपको लग रहा है कि परेशानी लगातार बढ़ रही है, तो बिना देर किए डॉक्टर से मिलें।

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